| Comprehension: | ||
| प्रश्न संख्या 1-5 के उत्तर निम्न अवतरण के आधार पर दीजिए। भारतीय मनीषा ने जिस प्रकार संतोष करने के लिए हमें सीख दी है, उसी तरह (1 ). _________ करने के लिए भी कहा है। चाणक्य के अनुसार हमें इन तीन उपक्रमों में संतोष नहीं करना चाहिए- त्रिषु नैव कर्तव्य: विद्यायां जप दानयो: अर्थात विद्यार्जन में कभी संतोष नहीं करना चाहिए कि बस, बहुत ज्ञान (2). ________ कर लिया इसी तरह जप और दान करने मे भी (3). ________ नहीं करना चाहिए। वैसे संतोष करने के लिए तो कहा गया है- जब आवे संतोष धन, सब धन धुरि समान’। हमें जो प्राप्त हो उसमें ही संतोष करना चाहिए- ‘सांई इतना दीजिए जामे कुटुंब समाय मैं भी भूखा न रहूँ, (4). ________ न भूखा जाए’। आज के मनुष्य की सांसारिकता मे बढ़ती लिप्तता, वैश्विक बाज़ारवाद और भौतिकता की चकाचौंध के कारण संत्रास, कुंठा और असंतोष दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसी असंतोष को दूर करने के लिए संतोषी बनना (5). _________ हो गया है। | ||
| SubQuestion No : 19 | ||
| Q.19 | रिक्त स्थान (4) के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द इनमें से कौन सा होगा? | |
| Ans | 1. राजा | |
| 2. शत्रु | ||
| 3. मित्र | ||
| 4. साधु | ||
Correct Ans Provided: 4