| Comprehension: | ||
| आकाशगंगा तारों का महापरिवार है. शायद नदी की धारा की तरह दिखाई पड़ने के कारण ही इसका नाम ‘आकाशगंगा’ पड़ा होगा| आकाश में कई आकाशगंगा हैं, लेकिन पृथ्वी से केवल एक ही आकाशगंगा दिखाई पड़ती है, जिसका नाम ‘स्पाइरल गैलेक्सी’ है| हमारी आकाशगंगा पहिये की आकृति वाली है, जिसके केंद्र तारक मछली की भाँति भुजाएँ निकलती प्रतीत होती हैं| आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आकाशगंगा में लगभग बीस अरब तारे हैं| उनमें तो अनेक तारे सूर्य से कई गुणा बड़े हैं| पृथ्वी से समतल पट्टी जैसी दिखने वाली इस आकाशगंगा को ऊपर या ठीक नीचे देखा जाए, तो यह बीच में उभार लिए प्लेट-सी दिखेगी| इस आकाशगंगा के केंद्र में तारों का भारी जमघट है| यही जमघट उभार की तरह दिखता है| अन्य तारे धूल और गैस के बादलों में समाए हुए हैं, जो केंद्र की तरफ आती भुजाओं का रूप बनाती हैं| हमारा सूर्य भी आकाशगंगा का एक सदस्य है| यह उसके केंद्र से सुदूर इसकी एक भुजा पर स्थित है| आकाशगंगा की विशालता समझने के लिए आपको पहले किलोमीटर से भी बड़ी ईकाई को समझना पड़ेगा| आपने प्रकाश-वर्ष का नाम सुना होगा| यह प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी होती है| आकाशगंगा इतनी विशाल है कि इसके एक छोर से दूसरे छोर की दूरी लगभग एक लाख प्रकाश-वर्ष है| | ||
| SubQuestion No : 22 | ||
| Q.22 | आकाशगंगा में किस मछली की भाँति भुजाएँ निकलती हुई दिखाई पड़ती हैं? | |
| Ans | 1. किंग फिश | |
| 2. रोहू मछली | ||
| 3. तारक मछली | ||
| 4. जैलफिश | ||
Correct Ans Provided: 3