| Comprehension: | ||
| रुदन में कितना उल्लास, कितनी शान्ति, कितना बल है । जो कभी एकान्त में बैठकर, किसी की स्मृति में, किसी के वियोग में, सिसक – सिसक और बिलख – बिलख नहीं रोया, वह जीवन के ऐसे सुख से वंचित है, जिस पर सैकड़ों हँसियाँ न्यौछावर हैं । उस मीठी वेदना का आनंद उन्हीं से पूछो, जिन्होंने यह सौभाग्य प्राप्त किया है । हंसी के बाद मन खिन्न हो जाता है आत्मा क्षुब्ध हो जाती है, मानो हम थक गये हों, पराभूत हो गये हों रुदन के पश्चात एक नवीन स्फूर्ति, एक नवीन जीवन, एक नवीन उत्साह का अनुभव होता है । | ||
| SubQuestion No : 8 | ||
| Q.8 | पूरे अवतरण का सारांश यह है कि? | |
| Ans | A. रुदन के बाद सुख का समय आने को होता है । | |
| B. रुदन हँसी से हर हालत में अच्छा है। | ||
| C. वियोग का रुदन संयोग की हँसी से कहीं अच्छा है। | ||
| D. हँसी के बाद हम थक जाते हैं, पराभूत हो जाते हैं । | ||
Correct Ans: A