| Comprehension: | ||
| मानव समाज का विकास तभी संभव है जब उसने सम्यक शिक्षा ग्रहण की हो। भारत में भी शिक्षा की गुणवत्ता पर दृष्टिपात करें तो सर्वप्रथम हमारे दृष्टिपथ में वैदिक-काल की शिक्षा की छवि स्पष्ट परिलक्षित होती है, जहाँ यह देखने को मिलता है कि गुरुकुल पद्धति में शिष्यों की संख्या सीमित थी। उनकी प्रतिभा के आधार पर उनकी उपस्थिति होती थी। तात्पर्य यह है कि छात्रों की संख्यात्मकता पर नहीं अपितु गुणात्मकता पर ध्यान दिया जाता था। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर दीजिए- | ||
| SubQuestion No : 69 | ||
| Q.69 | गुरुकुल में शिष्यों के चयन का आधार क्या था? | |
| Ans | 1. प्रतिभा | |
| 2. बल | ||
| 3. साहस | ||
| 4. रूप | ||
Correct Ans Provided: 1